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füegent mit ir zarte. |
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des mâze ie sich bewarte, |
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der getriwe stæte man |
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wol friwendinne schônen kan. |
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er denket, als ez lîht ist wâr, |
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"ich hân gedienet mîniu jâr |
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nâch lône disem wîbe, |
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diu hât mîme lîbe |
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erboten trôst: nu lige ich hie. |
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des hete mich genüeget ie, |
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ob ich mit mîner blôzen hant |
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müese rüeren ir gewant. |
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ob ich nu gîtes gerte, |
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untriwe es für mich werte. |
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solt ich si arbeiten, |
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unser beider laster breiten? |
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vor slâfe süeziu mære |
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sint frouwen site gebære." |
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sus lac der Wâleise: |
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kranc was sîn vreise. |
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Den man den rôten ritter hiez, |
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die künegîn er maget liez. |
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si wânde iedoch, si wær sîn wîp: |
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durch sînen minneclîchen lîp |
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des morgens si ir houbet bant. |
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dô gap im bürge unde lant |
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disiu magetbæriu brût: |
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wand er was ir herzen trût. |
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si wâren mit ein ander sô, |
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daz si durch liebe wâren vrô, |
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